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🌅 “उगते सूर्य को नमन के साथ छठ महापर्व संपन्न, आस्था की लहर से देश हुआ सराबोर”

उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व का समापन, दिल्ली-मुंबई से पटना तक घाटों पर दिखी भक्ति और रौनक

चार दिनों तक चलने वाला आस्था, श्रद्धा और आत्मसंयम का पर्व छठ महापर्व आज उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। देशभर में लाखों श्रद्धालुओं ने नदियों, तालाबों और कृत्रिम घाटों पर पहुंचकर भगवान भास्कर (सूर्य देव) और छठी मइया को अर्घ्य अर्पित किया। राजधानी दिल्ली से लेकर पटना, मुंबई, कोलकाता, रांची, वाराणसी, और लखनऊ तक घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर वातावरण ‘छठी मईया के जयकारों’ और भक्ति गीतों से गूंज उठा।

🌅 उगते सूर्य को दिया गया अर्घ्य

आज तड़के ही श्रद्धालु महिलाएं और पुरुष अपने घरों से घाटों की ओर रवाना हुए। कई स्थानों पर भक्त रातभर जागरण करते हुए भजन-कीर्तन में लीन रहे। जैसे ही पूरब की दिशा में सूर्य की पहली किरण फूटी, घाटों पर उपस्थित व्रती महिलाओं ने ‘उगते सूर्य देव’ को अर्घ्य अर्पित किया।
सूर्य को जल चढ़ाते समय श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था, चेहरे पर संतोष और मन में नवजीवन की कामना स्पष्ट झलक रही थी। मान्यता है कि उगते सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है, वहीं डूबते सूर्य को अर्घ्य देना परिवार के कल्याण और संतुलन का प्रतीक माना जाता है।

🌸 चार दिनों के व्रत का कठिन तप

छठ पर्व चार दिनों तक चलता है—नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और प्रातः अर्घ्य

  1. पहला दिन (नहाय-खाय): इस दिन व्रती शुद्ध स्नान कर प्रसाद के रूप में लौकी-भात या कद्दू-चावल का सेवन करते हैं और घर में पवित्रता बनाए रखते हैं।
  2. दूसरा दिन (खरना): व्रती पूरा दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं।
  3. तीसरा दिन (संध्या अर्घ्य): सूर्यास्त के समय व्रती घाटों पर पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
  4. चौथा दिन (प्रातः अर्घ्य): अंतिम दिन प्रातःकाल उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है, जिसके साथ ही व्रत का समापन होता है।

यह व्रत सबसे कठिन माने जाने वाले व्रतों में से एक है क्योंकि इसमें चार दिनों तक व्रती भोजन और पानी से भी परहेज करते हैं, साथ ही पवित्रता और संयम का विशेष ध्यान रखते हैं।

🏞देशभर के घाटों पर उमड़ी भीड़

पटना, जो छठ पूजा का केंद्र माना जाता है, वहां के गंगा घाटोंदीघा, कुड़ी घाट, गांधी घाट, और एनआईटी घाट—पर लाखों श्रद्धालुओं ने सूर्यदेव को अर्घ्य दिया।
दिल्ली में यमुना के तट पर काली घाट, आईटीओ घाट, और मजनू का टीला जैसे स्थलों पर छठ पूजा का भव्य आयोजन हुआ।
मुंबई के जुहू बीच, पवई झील, और सांताक्रूज़ में उत्तर भारतीय समुदाय ने पूरे उत्साह के साथ छठ का पर्व मनाया।
इसी तरह नोएडा, गाजियाबाद, गोरखपुर, रांची, कोलकाता, और भुवनेश्वर में भी छठ पूजा के लिए कृत्रिम तालाब और घाट तैयार किए गए थे।

प्रशासन की ओर से सुरक्षा और स्वच्छता के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे। एनडीआरएफ की टीमों ने नदी किनारे निगरानी रखी, वहीं महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी की गई थी।

🎶 गीत-संगीत और लोक परंपरा में डूबा माहौल

छठ पर्व का हर दृश्य लोक संस्कृति का जीवंत उदाहरण बन जाता है। घाटों पर गूंजते रहे पारंपरिक गीत—
केलवा जस नैहर बहs राजा, हो दिनन में होई ना रातिया
उग हे सूरज देव, अरघिया ले लेऽ
इन गीतों ने पूरे माहौल को भक्ति और उल्लास से भर दिया।

घर-घर में ठेकुआ, कसार, सूप और बांस के डाले में सजे फल-फूल, केले, नारियल, शकरकंद और गुड़ से सजी पूजा की थालियां दिखाई दीं। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा—साड़ी में सजी—छठी मईया से अपने परिवार की समृद्धि और संतति सुख की कामना करती रहीं।

🚉 घर वापसी में जुटे लोग

छठ पूजा के बाद अब श्रद्धालु अपने गृह नगरों से लौटने लगे हैं। दिल्ली, मुंबई, और सूरत जैसे शहरों से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड जाने वाली विशेष ट्रेनों में भारी भीड़ देखी गई। रेलवे ने अतिरिक्त कोच लगाए और कई छठ स्पेशल ट्रेनें भी चलाईं।

🌞 छठ: प्रकृति, परिवार और लोक आस्था का संगम

छठ पूजा न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस पर्व में सूर्य, जल, मिट्टी और वायु—चारों प्राकृतिक तत्वों का सम्मान किया जाता है। यह पर्व बताता है कि मानव जीवन का अस्तित्व प्रकृति के साथ संतुलन में ही संभव है।
छठ पूजा को महिलाओं की शक्ति, त्याग और संकल्प का पर्व भी माना जाता है। चाहे आधुनिक शहर हों या ग्रामीण परिवेश—हर जगह यह पर्व सामाजिक एकता और पारिवारिक प्रेम का प्रतीक बन गया है।

समापन

जैसे ही आज उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया गया, श्रद्धालुओं के चेहरों पर अपार शांति और आत्मसंतोष दिखाई दिया। व्रती महिलाओं ने जल से बाहर आकर प्रसाद का वितरण किया और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
देशभर में इस अवसर पर केवल एक ही संदेश गूंजता रहा —
जय छठी मइया, सुख-शांति और समृद्धि सबके जीवन में बनी रहे।”

 

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