Bharat Daily News

“बिहार में गरमाई सियासत: पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा की तिहरी एंट्री, आज कई जिलों में लगेगा चुनावी तड़का”

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर प्रचार का माहौल अब चरम पर पहुँच गया है। इस कड़ी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपने मुख्य स्तंभों को सक्रिय कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा आज राज्य में विभिन्न रैलियों व सभाओं के माध्यम से सियासी तड़का लगा रहे हैं।

मोदी का आगाज़ – समस्तीपुर व बेगूसराय

प्रधानमंत्री मोदी ने आज यानी 24 अक्टूबर 2025 को अपनी चुनावी मुहिम का शुभारंभ समस्तीपुर (करपुड़ी ग्राम) से किया, जहाँ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी नेता करपुड़ी ठाकुर की जन्मभूमि में उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद उसी दिन वे बेगूसराय में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।
मोदी ने सभा में यह संदेश दिया कि एनडीए ने बिहार को “जंगलराज” से विकास की राह पर लाया

 है।

अमित शाह की प्रचार बाधाएँ – सियान व बक्सर

गृह मंत्री अमित शाह आज राज्य में उस प्रचार अभियान की अगुवाई कर रहे हैं जिसे भाजपा ने बड़ी रणनीति के साथ तैयार किया है। शाह का आज का कार्यक्रम सीवान व बक्सर में रैलियों को शामिल करता है।
उनका मकसद उन विधानसभा क्षेत्रों में जनसमर्थन जुटाना है जिन्हें एनडीए अपने लिए निर्णायक मान रही है।

जेपी नड्डा का झटका – गोह व पाटेपुर

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी आज बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने पहले ही तीन-दिवसीय दौरे की शुरुआत की है जिसमें उन्होंने गोह (औरंगाबाद) व पाटेपुर (वैशाली) में सभाओं को संबोधित किया।
नड्डा ने इन सभाओं में विपक्षी गठबंधन पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि उनकी राजनीति “व्यवस्था विहीनता” की ओर ले जाती है।

क्यों है यह दौड़ महत्वपूर्ण?

क्या कह रहा है एजेंडा?

चुनौतियाँ व माहौल

निष्कर्ष

आज का दिन इसलिए खास है क्योंकि राज्य के तीन शीर्ष नेतृत्व ने एक साथ प्रचार की शुरुआत की है—मोदी, शाह और नड्डा। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि एनडीए इस चुनाव को बेहद रणनीतिक रूप से देख रही है। जहां मोदी ने समस्तीपुर व बेगूसराय में गणतांत्रिक संदेश दिए, वहीं शाह और नड्डा ने अन्य ज़रूरी सीटों पर अपनी पैठ बनाने की शुरुआत कर दी है।
अब सवाल यह है कि इस अभियान का असर मतदाता-मंच पर कितना गहरा होगा। क्या यह “विकास” की कहानी जनता तक पहुँच पाएगी या कथित वादों व तस्वीरों से आगे जाके वास्तविक बदलाव माना जाएगा? बिहार की राजनीति इस समय बहुत-से सवालों से घिरी हुई है और आज की रैलियाँ उन सवालों के जवाब तलाशेंगी।

 

Exit mobile version