Site icon Bharat Daily News

“उत्तराखंड-चीन बॉर्डर पर सतर्क रहना जरूरी, शांति का मतलब लापरवाही नहीं — CDS अनिल चौहान”

cds

देहरादून, 12 अक्टूबर 2025 — भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने रविवार को कहा कि देश की उत्तरी सीमाओं, विशेष रूप से उत्तराखंड से सटी चीन बॉर्डर पर सतर्क रहना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही यह सीमा इस समय शांत है, लेकिन हमें अपनी तैयारियों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए।

🇮🇳 उत्तराखंड सीमा की रणनीतिक अहमियत

सीडीएस चौहान ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति इसे भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। राज्य की चीन से लगने वाली सीमा लगभग 350 किलोमीटर लंबी है, जबकि नेपाल के साथ लगभग 275 किलोमीटर सीमा लगती है। इन सीमावर्ती क्षेत्रों में ऊँचाई, कठिन भौगोलिक स्थिति और मौसम के कारण रक्षा तैयारियों को हमेशा सशक्त बनाए रखना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि “हमारे सैनिक इस कठिन इलाके में हर मौसम में तैनात रहते हैं। उनकी सतर्कता के कारण ही यह सीमा अब तक शांत बनी हुई है। लेकिन शांत माहौल का यह मतलब बिल्कुल नहीं कि हमें लापरवाह हो जाना चाहिए। सीमा सुरक्षा हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता पर रहनी चाहिए।”

⚠️सतर्कता ही सुरक्षा की पहली शर्त’

जनरल चौहान ने कहा कि आज के दौर में सुरक्षा खतरे केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं हैं। साइबर वारफेयर, ड्रोन हमले और हाइब्रिड खतरों के दौर में “हर फ्रंट पर तैयार रहना जरूरी है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी युद्ध में “दूसरे स्थान पर आने वाले को विजेता नहीं कहा जाता।”

सीडीएस चौहान के अनुसार, “शांति का मतलब यह नहीं कि विरोधी देश अपनी गतिविधियों से पीछे हट गए हैं। हमें सीमा की हर हलचल पर पैनी नज़र रखनी होगी। हमारी तैयारियों का स्तर हमेशा ऊँचा रहना चाहिए।”

🧭 स्थानीय लोगों की भूमिका भी अहम

अपने संबोधन में जनरल चौहान ने सीमावर्ती इलाकों के स्थानीय नागरिकों, खासकर पूर्व सैनिकों, युवाओं और पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि वे सीमा की निगरानी और सुरक्षा तंत्र में “पहली आँख” बनें।

उन्होंने कहा कि, “स्थानीय लोग सबसे पहले किसी असामान्य गतिविधि को देख पाते हैं। इसलिए उनकी भागीदारी राष्ट्रीय सुरक्षा में अमूल्य है। सीमाई विकास योजनाओं के साथ-साथ हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि वहां के लोग सशक्त और जागरूक रहें।”

इसके अलावा, CDS चौहान ने बताया कि सरकार और सेना मिलकर एक नई नीति पर काम कर रहे हैं जिसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में सहकारी समितियों के माध्यम से सेना को आवश्यक सामान — जैसे राशन, ईंधन और दवाइयाँ — उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे न केवल आपूर्ति तंत्र मज़बूत होगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

🔰 चीन और पाकिस्तान दोनों से मिलते खतरे

सीडीएस चौहान ने अपने वक्तव्य में यह भी स्पष्ट किया कि भारत के लिए चीन और पाकिस्तान दोनों से जुड़ी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, “दोनों देशों के साथ सीमावर्ती विवाद भारत के लिए निरंतर सुरक्षा चुनौती हैं। हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।”

हाल ही में उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बनता नया सामरिक समीकरण भारत की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए देश की तीनों सेनाएँ हर संभावित खतरे का सामना करने के लिए तैयार रहनी चाहिए।

🏔सीमा विकास और सुरक्षा दोनों साथ

CDS चौहान ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि सीमावर्ती इलाकों का विकास सुरक्षा के साथ-साथ हो। सड़क, पुल, संचार और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार न केवल स्थानीय जीवन को बेहतर बना रहा है बल्कि सैनिक तैनाती और आपूर्ति में भी मदद कर रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम जैसे सरकारी अभियानों से सीमाई गांवों में पलायन कम हुआ है और लोगों में राष्ट्रभक्ति व जिम्मेदारी की भावना और अधिक मजबूत हुई है।

🇮🇳 निष्कर्ष

CDS अनिल चौहान का यह बयान उस समय आया है जब भारत अपने उत्तरी और पूर्वी सीमाक्षेत्रों में रक्षा अवसंरचना को तेज़ी से सुदृढ़ कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वक्तव्य न केवल एक रणनीतिक चेतावनी है बल्कि जनता और स्थानीय समुदायों के लिए एक जिम्मेदारी का आह्वान भी है।

 

Exit mobile version