भोपाल, 28 अक्टूबर —
मध्य प्रदेश में इस समय आसमान से बरस रही बूंदों ने फिज़ा को भिगो दिया है। अक्टूबर के अंतिम हफ्ते में जहां आमतौर पर सूखा और हल्की ठंड की दस्तक महसूस की जाती है, वहीं इस बार बारिश ने मौसम का मिज़ाज पूरी तरह बदल दिया है। राजधानी भोपाल से लेकर इंदौर, जबलपुर, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा और सागर तक, हर ओर बारिश का असर देखा जा रहा है। खेतों में पानी भर गया है, नदियाँ उफान पर हैं और कई इलाकों में प्रशासन ने एहतियातन अलर्ट जारी किया है।
🌦️ मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है, जिसके चलते प्रदेश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में अगले 48 घंटों तक तेज़ बारिश होने की संभावना जताई गई है।
भोपाल मौसम केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया, “मध्य प्रदेश में मानसूनी ट्रफ लाइन इस समय सक्रिय है। इस वजह से वातावरण में नमी बनी हुई है और बादलों की घनघोर उपस्थिति के चलते लगातार बारिश हो रही है। कुछ जिलों में भारी वर्षा (Heavy Rainfall) के आसार हैं।”
मौसम विभाग ने बालाघाट, मंडला, सिवनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, सागर और दमोह जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार, खंडवा और खरगोन जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
🌊 नदियाँ उफान पर, गांवों में जलभराव
लगातार बारिश से प्रदेश की कई नदियाँ और नाले उफान पर हैं। नर्मदा, तवा, बेतवा और सोन नदियों का जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है।
होशंगाबाद जिले में नर्मदा का पानी खतरे के निशान के करीब पहुँच गया है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अलर्ट रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। जबलपुर में तिलवारा डैम के गेट खोलने पड़े, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया।
कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें पानी में डूब गई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है और किसानों को खेतों में न जाने की चेतावनी दी गई है।
🌾 किसानों की चिंता – खरीफ फसल पर असर
बारिश से जहां शहरवासियों को ठंडक और राहत मिली है, वहीं किसानों के लिए यह बरसात चिंता का कारण बन गई है।
मकई, सोयाबीन और मूंगफली की फसलें कटाई के दौर में हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने खेतों में पानी भर दिया है। इससे फसलों के सड़ने और उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना है।
होशंगाबाद के किसान रामकुमार पटेल बताते हैं, “फसल तैयार थी, बस कटाई बाकी थी। लेकिन अब खेतों में कीचड़ और पानी भर गया है। अगर बारिश और दो दिन चली तो बहुत नुकसान होगा।”
कृषि विभाग के अधिकारी किसानों से अपील कर रहे हैं कि वे जल्दबाज़ी में फसल न काटें और जब तक मौसम स्थिर न हो जाए, तब तक भंडारण की तैयारी करें।
🏙️ शहरों में जलजमाव और ट्रैफिक जाम
राजधानी भोपाल में सोमवार को सुबह से ही झमाझम बारिश होती रही। कई प्रमुख सड़कों — एमपी नगर, बिट्ठल मार्केट, न्यू मार्केट और कोलार रोड — पर पानी भर गया।
इंदौर और उज्जैन में भी स्थिति कुछ ऐसी ही रही। घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही और लोगों को ऑफिस या स्कूल पहुँचने में दिक्कतें हुईं।
नगर निगम ने पानी निकासी के लिए पंप लगाए हैं, लेकिन भारी वर्षा के चलते राहत मिलने में समय लग सकता है।

🌤️ मौसम में ठंडक, लेकिन बढ़ी उमस
लगातार बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। भोपाल का अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। इंदौर में अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
हालांकि हवा में नमी ज़्यादा होने से उमस की स्थिति भी बनी हुई है। शाम होते-होते हल्की ठंड महसूस की जा रही है, जो आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है।
🛑 प्रशासन की तैयारी और राहत कार्य
राज्य सरकार ने सभी जिलों में कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुँचाने की व्यवस्था की जा रही है।
आपदा प्रबंधन दल (SDRF) को सतर्क रखा गया है। अब तक प्रदेश में किसी बड़े हादसे की खबर नहीं आई है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है।
मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर लोगों से अपील की है कि वे “बिना आवश्यकता घर से बाहर न निकलें और किसी भी आपात स्थिति में जिला प्रशासन से संपर्क करें।”
☀️ आगे क्या? – बारिश के बाद ठंड की दस्तक तय
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों तक राज्य के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद मौसम साफ होने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, “इस बारिश के बाद ठंड की लहर शुरू होगी, और नवंबर के पहले हफ्ते से मध्य प्रदेश में ठंड का प्रभाव तेज़ी से बढ़ेगा।”
राजधानी भोपाल और इंदौर में न्यूनतम तापमान में 4 से 5 डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है। यानी, बारिश के बाद अब सर्दी की दस्तक लगभग तय है।
🌈 निष्कर्ष
इस तरह, अक्टूबर के अंतिम दिनों में आई यह बारिश भले ही किसानों और प्रशासन के लिए चुनौती लेकर आई हो, लेकिन इससे राज्य के जलस्रोतों को भरने में मदद मिली है।
झीलों, बांधों और नदियों में जलस्तर बढ़ने से आने वाले महीनों में पेयजल संकट में राहत मिलेगी।
मौसम के इस अप्रत्याशित बदलाव ने साफ कर दिया है कि प्रकृति का मिज़ाज अब पहले जैसा नहीं रहा — और हमें इसके साथ तालमेल बिठाने की ज़रूरत है।