
- बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं। सभी राजनीतिक दल सक्रिय हैं। मुख्यधारा की लड़ाई बीजेपी–NDA बनाम महागठबंधन (RJD, कांग्रेस आदि) की है।
- पीएम मोदी का दौरा चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहाँ विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और राजनीतिक संदेश देना प्रमुख है।
मोदी के आरोप और घोषणाएँ
- अवैध प्रवासन एवं घुसपैठियों की “सुरक्षा” का आरोप
पीएम मोदी ने कांग्रेस और RJD पर आरोप लगाया है कि ये दल अवैध तरीके से आए प्रवासियों या घुसपैठियों की “राजनीतिक लाभ” के लिए रक्षा कर रहे हैं — यानी कि वोट-बैंक राजनीति का हिस्सा बना रहे हैं। - विकास परियोजनाएँ और “नया बिहार” का नारा
मोतिहारी में मोदी ने “नया बिहार” का नारा लगाया और यह दावा किया कि केंद्र की सरकार ने बिहार को विकास के नए प्रोजेक्ट्स दिए हैं। सड़क, रेल, बिजली, स्वास्थ्य एवं शहरी विकास योजनाओं का उल्लेख है। - विपक्ष की प्रतिकिया
- तेजस्वी यादव ने मोदी पर आरोप लगाया कि “दोहरे इंजन सरकार” के बावजूद बिहार की अर्थव्यवस्था, किसानों की हालत, बेरोज़गारी आदि मामलों में राज्य पिछड़ गया है।
- लालू प्रसाद यादव ने कहा कि मोदी जेडीयू की राजनीति को कमजोर करने के लिए आते हैं, और “वायदे और नारे” अधिक हैं, काम नहीं।
- कांग्रेस ने भू-माफिया / सरकारी जमीन सौदे आदि को लेकर गंभीर आरोप लगाए — जैसे कि 1050 एकड़ जमीन ₹1 में किसे दी जा रही है, “दोस्तों” को।
- परियोजनाओं का उद्घाटन/शिलान्यास
मोदी द्वारा कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है या शिलान्यास हुआ है, अरबों रुपये की लागत से। उदाहरण के लिए, मोतिहारी में रेलवे एवं सड़क प्रोजेक्ट्स, सिवान में नई योजनाएँ।
महत्वपूर्ण मुद्दे‑विरोधाभास
- विकास बनाम अपेक्षाएँ: केंद्र सरकार ने विकास प्रोजेक्ट्स देने की बात कही है, लेकिन विपक्ष कह रहा है कि पिछड़ेपन, बेरोज़गारी, किसानों की आर्थिक हालत आदि में सुधार नहीं हुआ है। इस तरह जनता की अपेक्षाएँ और सरकार के दावे अक्सर पृथक दिखते हैं।
- चुनावी माहौल: यह दौरा एवं घोषणाएँ चुनावी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती हैं। विपक्ष इन उद्घाटनों पर “चुनावी स्टंट” का आरोप लगाता है।
- घुसपैठ और सीमा सुरक्षा मुद्दा: मोदी ने सीमांचल सहित सीमावर्ती इलाकों में अवैध प्रवासन को बढ़ा हुआ बताया है, और विपक्ष को आरोप लगाया है कि वो इसे राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग कर रही है। यह विषय संवेदनशील है क्योंकि इससे सामाजिक, राजनीतिक एवं मानवाधिकार संदर्भ में सवाल उठते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया और संभावित प्रभाव
- जनता में विकास परियोजनाओं की स्वीकृति है, क्योंकि सड़क, रेलवे, बिजली आदि की कमी वर्षों से महसूस की जा रही है। अगर ये काम सही तरीके से हो रहे हों, तो उनका सकारात्मक प्रभाव होगा।
- लेकिन विपक्षी दलों द्वारा उठाये गए मुद्दे जैसे कि “वायदे कितने पूरे हुए?”, “क्यों अभी‑अभी घोषणा?” आदि सवाल भी लोगों के मन में हैं।
- मीडिया एवं राजनीतिक विरोधियों द्वारा इन उद्घाटनों को “चुनावी विज्ञापन” जैसा बताया जा रहा है, इससे जन विश्वास पर असर पड़ सकता है—अगर घोषणाएँ सच में समय पर पूरी न हों।
विश्लेषण: क्या यह सिर्फ चुनावी राजनीति है?
- हाँ, यह दौरा एवं घोषणाएँ चुनावी रणनीति का स्पष्ट हिस्सा हैं। चुनाव नज़दीक हैं, इसलिए बड़े‑बड़े प्रोजेक्ट्स और घोषणाएं की जा रही हैं ताकि जनता में सरकार की सकारात्मक छवि बने।
- लेकिन, सिर्फ घोषणाएँ ही पर्याप्त नहीं हैं; उनका क्रियान्वयन और समय पर पूरा होना ज़रूरी है। जनता उम्मीद करती है कि प्रस्तावित योजनाएँ धरातल पर काम करें।
- तुलनात्मक विफलताएँ: केंद्र सरकार दावा कर रही है कि बिहार को विकास की सौगातें मिली हैं; विपक्ष कह रहा है कि सूचकांकों जैसे निवेश, प्रति व्यक्ति आय, किसानों की आय आदि में बिहार पिछला है। यदि ये अंतर सुधरता है, तभी “नया बिहार” का नारा अर्थ देगा।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी का बिहार दौरा वर्तमान में राजनीतिक, विकासात्मक और चुनावी सभी दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। घोषणाएँ और आरोप‑प्रत्यारोप की राजनीति चुनावी समर में आम है। लेकिन फर्क तब पड़ेगा जब:
- ये विकास परियोजनाएँ समय पर पूरी हों,
- उनका लाभ आम जनता तक पहुंचे,
- राज्य की समस्याएँ जैसे बेरोज़गारी, कृषि संकट, शिक्षा‑स्वास्थ्य की अवस्थाएँ सुधरें।
अगर ये होंगी, तो “नया बिहार” केवल एक नारा नहीं, हक़ीक़त बनेगा। अन्यथा, यह सिर्फ चुनावी शोर ही रह जाएगा।