नई दिल्ली — भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2024‑25 (आकलन वर्ष AY 2025‑26) के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल

करने की प्रारंभिक अंतिम तिथि 31 जुलाई 2025 से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दी है। यह निर्णय उन टैक्सपेयर्स (करदाताओं) को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिनके खाते ऑडिट्ड नहीं होते।
क्या हुआ और क्यों?
- ITR फॉर्म और यूटिलिटीज़ में बदलाव
इस वर्ष ITR फॉर्म्स में “संरचनात्मक और सामग्री (structural & content)” बदलाव किए गए हैं। नए नियम और अधिनियम (Finance Act वगैरह) के अनुरूप रिपोर्टिंग को सुस्पष्ट बनाने की कोशिश की गई है
साथ ही, ITR फाइलिंग के लिए ज़रूरी सॉफ्टवेयर (utilities), एक्सेल‑यूटिलिटीज़ आदि समय से तैयार न होने के कारण सरकार को अधिक समय लेना पड़ा।
- TDS / TDS क्रेडिट की प्रतीक्षा
करदाताओं का कहना था कि TDS का विवरण (statements) और उससे जुड़ा क्रेडिट उनके खाते में समय पर नहीं आ रहा था, जिससे रिटर्न भरने में समस्या हो रही थी। ऐसे में इस डेटा का सम्पूर्ण रूप से प्राप्त होना आवश्यक है। - ऑडिट आवश्यक नहीं रखने वाले टैक्सपेयर्स को राहत
यह बढ़ी हुई समय सीमा केवल उन लोगों के लिए है जिनके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है — जैसे कि कर्मचारी, पेंशनभोगी, जिनकी आय अन्य स्रोतों से है, छोटे व्यवसाय या सेवा‑प्रदाता जिनका टर्नओवर ऑडिट थ्रेशहोल्ड से कम है आदि।
प्रभाव और आशंकाएँ
- करदाताओं को समय की राहत
यह निर्णय उन लोगों के लिए विशेष रूप से राहतभरा है जो नए फॉर्म बदलाव को समझने, TDS क्रेडिट मिल जाने की प्रतीक्षा या दस्तावेज़ों को पूरी तरह तैयार करने में समय ले रहे थे। - तकनीकी glitches की शिकायतें
करदाताओं ने ई‑फाइलिंग पोर्टल, फॉर्म अपलोडिंग, पोर्टल का स्लो होना आदि तकनीकी समस्याएँ बताईं। इन समस्याओं ने दायरियों (filings) में देरी उत्पन्न की और आखिरी समय में लोगों पर दबाव बढ़ा। - दायित्वों (liabilities) और दंड‑शुल्क (penalties)
ध्यान देने योग्य है कि जबकि ITR दाखिल करने की समय सीमा बढ़ी है, कुछ अन्य देयताएँ और कर संबन्धी भुगतान (जैसे self‑assessment tax) अपनी निर्धारित समय सीमा पर ही देना आवश्यक हो सकते हैं। यदि ये समय पर नहीं किए गए, तो उन पर ब्याज या पेनाल्टी लग सकती है। - संभावित एवं अतिरिक्त विस्तार की उम्मीदें
कई कर सलाहकार संघों, व्यापार मंडलियों और CA सोच समूहों ने सरकार से आग्रह किया है कि यदि तकनीकी समस्याएँ पूरी तरह दूर नहीं होती हैं, तो अंतिम तिथि को और आगे बढ़ाया जाए। लेकिन अब तक ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
सरकार की ओर से क्या कहना है?
- CBDT की आधिकारिक सूचना
केंद्रीय बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) के एक प्रवक्ता ने कहा कि ये बदलाव करदाताओं को “सुविधाजनक और निर्बाध फाइलिंग अनुभव” देने के उद्देश्य से किए गए हैं। - नए फॉर्म्स और सिस्टम टेस्टिं कीग आवश्यकता
उन बदलावों की वजह से जिन्हें लाया गया है, बैक‑एंड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक यूटिलिटीज़, रिपोर्टिंग स्वरूपों एवं पोर्टल की तैयारी में अतिरिक्त समय लग रहा था।
क्या अभी भी संभावनाएँ बची हैं?
- और विस्तार
तकनीकी टीमों व पोर्टल सेवा प्रदाताओं से लगातार मिल रही शिकायतों ने यह संकेत दिए हैं कि 15 सितंबर तक सभी के लिए फाइलिंग पूरी तरह सहज न हो पाए। इस आधार पर कर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि असुविधाएँ बनी रहीं तो सरकार फिर से समय सीमा बढ़ा सकती है। - ऑडिट संबंधी मामलों में स्थिति क्या होगी
जिन करदाताओं के मामले ऑडिट आवश्यक हैं, उनके लिए अभी भी पुरानी तिथि या भिन्न नियम लागू हो सकते हैं। ऑडिट से जुड़े फॉर्म और रिपोर्टिंग शर्तें अभी पूरी तरह अपडेट नहीं हो सकती थीं। उस स्थिति में वे विशेष निर्देशों के अधीन होंगे।
क्या करदाताओं को क्या करना चाहिए?
- दस्तावेज़ तैयार रखें
अपने वर्षों के आय‑दस्तावेज, TDS‑statements, बैंक ब्याज विवरण, निवेश प्रमाण पत्र आदि समय रहते इकट्ठे करें। सुनिश्चित करें कि TDS‑क्रेडिट आपके खाते में प्रतिबिंबित हो चुका हो। - नए ITR फॉर्म और यूटिलिटीज़ को समझें
नए ITR फॉर्म किस तरह से बदल गए हैं, किन हिस्सों में अतिरिक्त सूचना मांगी जा रही है, कौन से schedule शामिल हैं, आदि की जानकारी रखें। यदि यूटिलिटी या पोर्टल पर कोई confusion हो, तो विशेषज्ञ या CA से सलाह लें। - समय रहते फाइल करें
भले ही अधिक समय मिला हो, देरी करने पर पेनाल्टी की संभावना, ब्याज या अन्य लेट‑फिचर्स हो सकते हैं। इसके अलावा, समय पर दाखिल करने से टैक्स रिफंड या अन्य लाभ जल्दी मिलेंगे। - ओनलाइन पोर्टल की स्थिति देखें
पोर्टल अप‑टू‑डेट है या नहीं, यूटिलिटीज़ उपलब्ध हैं या नहीं — ये देखें। यदि पोर्टल में कोई समस्या हो, सरकार या टैक्स विभाग के नोटिफिकेशन पर नजर रखें। - आवश्यक भुगतान समय‑से करें
अगर आपकी आय या टैक्स स्थिति ऐसी है कि self‑assessment tax या advance tax देना है, तो वह निर्धारित तिथि पर ही भरें ताकि ब्याज या जुर्माने से बचा जा सके।
निष्कर्ष
इस फैसले से यह स्पष्ट है कि सरकार करदाताओं की परेशानियों को समझ रही है, विशेष रूप से तकनीकी और प्रक्रियागत बदलावों की वजह से जो अनपेक्षित देरी और बाधाएँ उत्पन्न कर रहे हैं। अब समय मिलना करदाताओं को यह सुनिश्चित करने का अवसर देता है कि वे पूरी तरह से तैयार होकर, सटीक जानकारी के साथ, कंप्लायंस करें और किसी भी प्रकार की अनावश्यक समस्या या दंड‑शुल्क से बचें।