7 सितम्बर 2025 को भारत समेत पूरी दुनिया में एक अद्भुत खगोलीय घटना घटने जा रही है, जब चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) होगा। यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 8:25 बजे से शुरू होगा और रात 9:56 बजे अपने पूर्ण रूप में पहुंचेगा, जबकि इसका समापन 11:28 बजे होगा। यह खगोलीय घटना एक सामान्य चंद्रग्रहण से थोड़ा अलग है, क्योंकि यह आंशिक चंद्रग्रहण (Partial Lunar Eclipse) होगा। इस आंशिक ग्रहण में चंद्रमा का कुछ हिस्सा पृथ्वी की छाया में डूब जाएगा, लेकिन उसका पूरा चंद्रमा अंधकारमय नहीं होगा।
चंद्रग्रहण क्या है?
चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी अपने अंतरिक्ष में स्थित सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है। इस प्रक्रिया में, चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया का असर पड़ता है, जिसके कारण चंद्रमा का रंग बदल सकता है। कभी यह रक्तिम लाल रंग का हो सकता है (जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है), तो कभी यह सामान्य अंधेरे रंग में बदलता है। इस ग्रहण का दृश्य बहुत ही आकर्षक और रहस्यमय होता है।
7 सितम्बर का चंद्रग्रहण
यह चंद्रग्रहण आंशिक होगा, जिसका अर्थ है कि चंद्रमा का केवल एक हिस्सा पृथ्वी की छाया में आएगा। हालांकि यह एक सामान्य चंद्रग्रहण की तरह भव्य और प्रभावशाली नहीं होगा, लेकिन फिर भी यह खगोल प्रेमियों के लिए एक रोचक अवसर होगा। इस दौरान चंद्रमा के एक हिस्से का रंग हल्का या गहरा लाल या भूरे रंग में परिवर्तित हो सकता है।

चंद्रग्रहण के समय और असर
- समय: यह ग्रहण भारतीय समयानुसार 8:25 बजे रात से शुरू होगा और 11:28 बजे तक समाप्त होगा।
- मुख्य समय (Maximum Eclipse): ग्रहण का अधिकतम बिंदु 9:56 बजे होगा, जब चंद्रमा का सबसे बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया में होगा।
चंद्रग्रहण का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
भारत में चंद्रग्रहण को लेकर कई धार्मिक मान्यताएँ हैं। हिंदू धर्म में चंद्रग्रहण को एक अशुभ घटना माना जाता है। इसलिए ग्रहण के समय मंदिरों में पूजा बंद कर दी जाती है और लोग अपने दैनिक कार्यों को स्थगित कर देते हैं। महिलाएँ अक्सर ग्रहण के समय पानी से दूर रहने की सलाह देती हैं, और कुछ लोग विशेष रूप से ग्रहण के समय स्नान करने या उबटन करने की परंपरा का पालन करते हैं।
कुछ लोग इसे एक प्रकार की शुद्धिकरण प्रक्रिया मानते हैं और ग्रहण के बाद पवित्र नदी में स्नान करने का महत्व मानते हैं। इस दिन विशेष रूप से उपवास और पूजा का आयोजन भी होता है।
इसके अलावा, कई लोग इसे एक प्राकृतिक घटना मानते हुए इसके बारे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी प्राप्त करते हैं। खगोलशास्त्रियों के लिए यह समय चंद्रमा की गति और पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के बीच की जटिल संबंधों को समझने का होता है।
चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्रग्रहण का कोई भी हानिकारक प्रभाव पृथ्वी पर नहीं पड़ता है। यह केवल एक खगोलीय घटना है, जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की स्थिति पर निर्भर करती है। इस दौरान चंद्रमा की रोशनी में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता, लेकिन यह घटना खगोलशास्त्रियों के लिए एक मूल्यवान अध्ययन का अवसर प्रदान करती है।
चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा की छाया और उसका रंग वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस बात को समझने का एक अच्छा तरीका होता है कि पृथ्वी की छाया कैसी होती है। यह पृथ्वी के वायुमंडल की स्थिति और उसकी व्याप्ति पर भी निर्भर करता है। जब पृथ्वी के वायुमंडल में धूल और गैसें होती हैं, तो चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है, जो रक्तिम चंद्रग्रहण (ब्लड मून) के नाम से जाना जाता है।
चंद्रग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?
- क्या करें?
- चंद्रग्रहण के समय खगोलशास्त्रियों की सलाह है कि आप इस अद्भुत घटना का दृश्य अपने नजदीकी खुले स्थान से देख सकते हैं।
- इस दिन धार्मिक पूजा और ध्यान के समय ग्रहण का ध्यान करना अच्छा होता है।
- चंद्रग्रहण के समय अपने विचारों को शुद्ध और सकारात्मक रखने की कोशिश करें।
- क्या न करें?
- चंद्रग्रहण के दौरान आंखों पर सीधे सूर्य या चंद्रमा की तेज रोशनी डालने से बचें, हालांकि चंद्रग्रहण की रोशनी सूर्य से बहुत कम होती है, फिर भी बेहतर है कि आप इसे देखे बिना अपना ध्यान केंद्रित करें।
- कुछ लोग इस दौरान भारी भोजन और शराब से बचने की सलाह देते हैं।
निष्कर्ष
7 सितम्बर का चंद्रग्रहण खगोलप्रेमियों और वैज्ञानिकों के लिए एक शानदार अवसर होगा, जहां वे पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के संबंध को और बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। इसके साथ ही यह हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से भी जुड़ी एक अहम घटना होगी। इस समय को आप अपनी दिनचर्या में शांति और ध्यान के साथ गुजार सकते हैं और इस अद्भुत खगोलीय घटना का आनंद ले सकते हैं।
आप इस चंद्रग्रहण को न केवल एक खगोलीय घटना के रूप में देख सकते हैं, बल्कि इसे एक मानसिक और आत्मिक शुद्धता के अवसर के रूप में भी स्वीकार सकते हैं।