नगर — नेपाल, 10 सितंबर 2025:
सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अचानक से लगा प्रतिबंध, व्यापक “जन‑जेड” आंदोलन और सरकार के कड़े तेवर — इन सबकी टक्कर में नेपाल इस समय गहरे राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है।
उत्पत्ति: प्रतिबंध या सिलसिले की आग?
सरकार ने घोषणा की कि फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर), YouTube जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नेपाल में तभी काम करने की अनुमति होगी जब वे स्थानीय कानूनों के तहत पंजीकरण करें और सरकारी निगरानी स्वीकार करें। इसका उद्देश्य झूठी खबरों, अपराध तथा अभद्रता पर अंकुश लगाना बताया गया। लेकिन विरोधियों का कहना था कि यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने की कोशिश है, और यह बंदिश राजनीतिक आलोचना को दबाने की सोची-समझी चाल है।

“जन‑जेड” आंदोलन का जन्म
युवा वर्ग, खासकर जनरेशन Z यानी किशोरावस्था से लेकर शुरुआती 20s के लोग, सोशल मीडिया के माध्यम से संवेदनशील मुद्दों को उजागर करते आए थे। यह फैसला उनके लिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला था। राजधानी काठमांडू में संसद भवन के आसपास हजारों युवा एकत्रित हुए, “Stop corruption, not social media” जैसे नारे बुलंद हुए।
हिंसक झड़पों का विस्तार
8 सितंबर को काठमांडू के माइटीघर मंडला और न्यू बानेश्वर इलाकों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक रूप धारण कर गए। सुरक्षा बल ने आंसू गैस, जल तोड़ और लाइव गोलियां तक का इस्तेमाल किया। कम से कम 17 लोग मारे गए और 145 घायल हुए, जिनमें कई घातक रूप से घायल थे। अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी था।
मौतों की संख्या बढ़ी— 19 से आगे
अगले दिन तक मृतकों की संख्या कम से कम 19 हो गई। घायल 100 से अधिक बताए गए। इस बीच, गृह मंत्री रमेश पाठक (Lekhak) ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया।
आपातकालीन स्थिति: सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटा, कर्फ्यू लगाया
भीषण हिंसा के बीच सरकार ने आपात बैठक बुलाकर प्रतिबंध को वापस ले लिया और सभी 26 प्लेटफॉर्म्स का उपयोग पुनः शुरू किया गया। साथ ही काठमांडू गुरुवार (और कई अन्य शहरों) में अघोषित कर्फ्यू लगा।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतीक: “One Piece” का स्ट्रॉ हैट ध्वज
विशेष संकेतों में से एक था ‘One Piece’ ऐनिमे की “Straw Hat Pirates” की एकता और विद्रोह का प्रतीक — जो विरोध करने वालों की एकता का अनूठा सांकेतिक रूप बन गया।
सरकार के प्रति जन‑जेड की मांगें और नाराजगी
युवा वर्ग सिर्फ प्लेटफ़ॉर्म की बहाली या मंत्री के इस्तीफे से संतुष्ट नहीं था। उनकी नाराजगी व्यापक— भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और राजनैतिक पारदर्शिताओं की कमी पर केंद्रित थी।
हिमालय से सटे भारत में तनाव की गूँज
नेपाल में हिंसा के प्रभाव भारत में भी महसूस किए गए। बिहार के सात जिलों की सीमा नेपाल से सटी होने के कारण बंद कर दी गई और SSB को अलर्ट पर रखा गया। सीमावर्ती इलाकों की सजगता बढ़ा दी गई।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने फोर्स का दोषी उपयोग बताया और स्वतंत्र जांच की मांग की।
आने वाले दिनों की राह
सरकार ने एक 15-दिन की जांच समिति गठित करने की बात कही है, ताकि हिंसा के कारणों और भविष्य में बचाव के उपायों की सिफारिश की जा सके। मृतकों के परिवारों को मुआवजा और घायलों को मुफ्त इलाज देने का ऐलान किया गया।
हालांकि प्रतिबंध हटा लिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह आंदोलन सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संघर्ष नहीं— पूरे राजनीतिक ढांचे, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और युवाओं की निराशा के खिलाफ एक व्यापक बदलाव की आह्वान है
समापन में, नेपाल की ‘जन‑जेड’ क्रांति अब सिर्फ सोशल मीडिया की लड़ाई नहीं— यह युवा बदलाव, पारदर्शिता, सामाजिक न्याय और शासन की जवाबदेही की लड़ाई बन चुकी है। संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ, लेकिन यह आंदोलन भविष्य के नेपाल के दिशा‑निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।