
नई दिल्ली, 9 सितंबर 2025 – भारत के मौजूदा महाराष्ट्र राज्यपाल चन्द्रपुरम पोनुस्वामी (सी.पी.) राधाकृष्णन को आज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) द्वारा भारत का नया उपराष्ट्रपति चुना गया है। उनका चुनाव परिणाम अत्यधिक स्पष्ट और निर्णायक रहा, जिससे देश में राजनीतिक हलकों में हल्की हलचल भी मची है।
चुनाव की प्रक्रिया और परिणाम
आठ अगस्त को जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से पद त्यागने के बाद इस चुनाव की घोषणा की गई थी। निर्वाचन प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66‑68 के तहत पूरी पारदर्शिता और समयसीमा का पालन करते हुए सम्पन्न हुई ।
- संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के कुल 781 निर्वाचकों में से 767 सांसदों ने मतदान किया, जिसमें 752 मत वैध और 15 मत अमान्य घोषित किए गए ।
- NDA के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन को 452 मत मिले (60.10%), जबकि विपक्ष के उम्मीदवार पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 मत (39.90%) मिले।
- इस अत्यंत स्पष्ट जीत के साथ, विजयी अंतर 152 मतों की रही जो राजनीतिक विश्लेषकों में विपक्ष की एकता पर सवाल खड़े कर रही है ।
विपक्ष में एकता की कमी – “क्रॉस‑वोटिंग” की चर्चा
विपक्ष के संसदीय हिस्से में एकजुटता की कमी उजागर हुई। कई विशेषज्ञ और मीडिया रिपोर्टों में “क्रॉस‑वोटिंग” की संभावना जताई गई है—जिसमें कुछ opposition सांसद अप्रत्याशित रूप से NDA उम्मीदवार को वोट दे गए हों। ऐसा राजनीतिक व्यवहार चुनावी रणनीतियों और गठबंधन की मजबूती पर गंभीर प्रश्न छोड़ता है।
सी.पी. राधाकृष्णन—एक संक्षिप्त राजनीतिक परिचय
- जन्म: 20 अक्टूबर 1957, तिरुप्पुर, तमिलनाडु ।
- आरएसएस से जुड़ाव से कांग्रेस जगत में पदार्पण, बाद में जनसंघ और फिर BJP में सक्रिय भूमिका।
- सांसद के रूप में दो बार कोयंबतूर से लोकसभा सदस्य (1998, 1999) चुने गए, और संसदीय स्थायी समितियों का नेतृत्व भी किया ।
- 2016–2020: Coir Board के अध्यक्ष रहे, जिसके दौरान सहExports ने नई ऊँचाई प्राप्त की ।
- 2020–2022: BJP के केरल प्रभारी नियुक्त ।
- राज्यपाल के रूप में: झारखंड (2023–2024), तेलंगाना और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी (अतिरिक्त प्रभार), और वर्तमान में महाराष्ट्र (2024–2025) के राज्यपाल ।
- व्यक्तिगत पहचान: कृषि और उद्योग में रुचि, खेलों में सक्रिय—टेबल टेनिस, क्रिकेट, वॉलीबॉल, तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व ।
चुनाव के बाद प्रतिक्रियाएँ और राजनीतिक संदेश
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ट्विटर (या “X”) पर बधाई देते हुए कहा कि राधाकृष्णन ने हमेशा समाज सेवा और कमजोरों के उत्थान के लिए काम किया है। उन्हें “उच्च संविधानिक मूल्यों को मजबूत करने वाले और संसदीय विमर्श को समृद्ध करने वाले उपराष्ट्रपति” के रूप में वर्णित किया।
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई सियासी हस्तियों ने राधाकृष्णन को जीत पर बधाई दी और उनके नेतृत्व से देश को और मजबूती मिलेगी ऐसी आशा जताई ।
- विपक्षी गिरोह सुदर्शन रेड्डी ने उच्च पद के चुनाव को “वैचारिक मुकाबला” बताया, यह दर्शाते हुए कि यह लड़ाई मात्र राजनीतिक नहीं, बल्कि विचारधारा की भी है।
चुनाव की ऐतिहासिक और संवैधानिक प्रासंगिकता
- यह भारत में पहला समय है जब उपराष्ट्रपति का चुनाव समय–पूर्व हुआ है—वह भी पहले से निर्धारित अंत तक पहुँचने से पहले पद छोड़ने के कारण ।
- संवैधानिक दृष्टिकोण से योचना, वोटिंग, और निर्वाचन प्रक्रिया ने लोकतांत्रिक स्वस्थता और कानूनी समयबद्धता की दृष्टि से आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया।
- यह चुनाव NDA के संसदीय प्रभुत्व की पुष्टि के साथ-साथ विपक्ष को एकजुट होने की जरूरत का सन्देश भी था।
राजनीति पर प्रभाव और आगे की राह
| विषय | प्रभाव / संकेत |
| विपक्षी एकता | कमजोर संरचना का संकेत; संभावित क्रॉस‑वोटिंग से असंगठित विपक्ष की दशा स्पष्ट हुई। |
| NDA का आगे बढ़ता प्रभुत्व | संसदीय स्थिति मजबूत; संवैधानिक पदों पर भरोसेमंद नेता स्थापित करने की रणनीति। |
| सी.पी. राधाकृष्णन की भूमिका | अनुभव और विश्वसनीयता पर खरा; विधान परिषद में अध्यक्षत्व की जिम्मेदारी निभाएंगे। |
| लोकतंत्र की स्वच्छता | समय पर चुनाव और निष्पक्ष प्रक्रिया ने लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाई। |
निष्कर्ष
सी.पी. राधाकृष्णन का 452 मतों से उपराष्ट्रपति निर्वाचित होना सिर्फ एक चुनाव परिणाम नहीं—यह भारतीय राजनीति में गठबंधनों की भूमिका, संवैधानिक प्रक्रिया की पवित्रता, और अनुभवपूर्ण नेतृत्व की आवश्यकता को उजागर करता है। भविष्य में उनका कार्यकाल राजनैतिक और संवैधानिक धरातल पर कई महत्वपूर्ण पहलुओं का साक्षी बनेगा।