देहरादून, 12 सितंबर 2025 –
उत्तराखंड एक बार फिर प्रकृति के प्रकोप का शिकार हुआ है। लगातार हो रही मूसलधार बारिश, भूस्खलन और बाढ़ ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ी इलाकों में सड़कों का टूटना, गांवों का कट जाना, पुलों का बह जाना और जन-धन की भारी क्षति ने राज्य को गहरे संकट में डाल दिया है। इस मुश्किल घड़ी में केंद्र सरकार ने राज्य को राहत देने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा किया और वहां की जमीनी स्थिति का जायज़ा लिया। उन्होंने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की और एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा की। प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि इससे प्रभावितों को मनोबल भी मिला है।
आपदा की भयावहता
बीते कुछ दिनों से उत्तराखंड में मूसलधार बारिश के कारण कई ज़िलों में भयंकर तबाही मची हुई है। खासकर चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और टिहरी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और नदी-नालों के उफान ने गांवों को बुरी तरह प्रभावित किया है। सैकड़ों परिवार बेघर हो चुके हैं, सड़कों और पुलों के टूटने से कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
अब तक की जानकारी के अनुसार, इस आपदा में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है, कई लापता हैं और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हजारों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं और उन्हें भोजन, पानी, दवाइयों और अन्य मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री का दौरा: संवेदनशीलता और संकल्प का परिचायक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और फिर देहरादून पहुंचकर आपदा प्रबंधन विभाग, सेना, एनडीआरएफ और राज्य प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रधानमंत्री ने प्रभावित लोगों से भी मुलाकात की, उनके दुख-दर्द को सुना और भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार उनके पुनर्वास के लिए हर संभव मदद करेगी। उन्होंने कहा:
“उत्तराखंड में आई इस भीषण आपदा से पूरा देश दुखी है। यह एक कठिन समय है, लेकिन हम सब मिलकर इससे उबरेंगे। केंद्र सरकार राज्य सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है।”
विशेष राहत पैकेज की घोषणा
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर उत्तराखंड के लिए 3500 करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की घोषणा की। इस राशि का उपयोग निम्नलिखित कार्यों में किया जाएगा:
- तत्काल राहत एवं पुनर्वास – प्रभावितों के लिए अस्थायी शिविर, भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सुविधाएं।
- सड़क और पुलों की मरम्मत – खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में संपर्क बहाली के लिए।
- बिजली और जल आपूर्ति व्यवस्था का पुनर्निर्माण।
- फसल और मवेशियों के नुकसान का मुआवजा – किसानों को विशेष सहायता पैकेज के तहत मुआवज़ा मिलेगा।
- भविष्य की आपदाओं के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली का सुदृढ़ीकरण – तकनीकी उपकरण और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण के लिए धनराशि आवंटित की जाएगी।
राहत और बचाव कार्यों में तेजी
प्रधानमंत्री के निर्देश पर एनडीआरएफ की 12 अतिरिक्त टीमें उत्तराखंड भेजी गई हैं। सेना, अर्धसैनिक बल और स्थानीय प्रशासन मिलकर राहत कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को निकाला जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर लगाए हैं। डॉक्टरों की टीमें लगातार घायलों का इलाज कर रही हैं। साथ ही महामारी फैलने से रोकने के लिए सफाई और सैनिटेशन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
राज्य सरकार की भूमिका और मुख्यमंत्री का वक्तव्य
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा:
“प्रधानमंत्री जी का यह दौरा संकट की इस घड़ी में हमारे लिए बहुत बड़ा संबल है। उनके मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से हम इस आपदा से जल्द उबरने का प्रयास करेंगे। राज्य सरकार हर प्रभावित नागरिक तक सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने भी आपदा राहत कोष से 500 करोड़ रुपये जारी किए हैं, और सभी जिलाधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
भविष्य की चुनौतियां और समाधान की दिशा
उत्तराखंड एक भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य है। बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाएं यह बताती हैं कि दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है। इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर प्रयास कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भविष्य में इस तरह की आपदाओं से बेहतर तरीके से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, सुदृढ़ आपदा प्रबंधन प्रणाली और आमजन को जागरूक करने की दिशा में विशेष कार्य योजना तैयार की जाएगी।
जनता का साथ – एकजुटता ही समाधान
इस आपदा में आम जनता, स्वयंसेवी संस्थाएं और स्थानीय संगठनों की भागीदारी सराहनीय रही है। युवाओं ने राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। कई संगठनों ने भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण किया है।
यह समय धैर्य और एकजुटता का है। एकजुट प्रयास ही उत्तराखंड को इस संकट से उबार सकते हैं।
निष्कर्ष
उत्तराखंड की इस आपदा में जन-धन की बड़ी क्षति हुई है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का दौरा और केंद्र सरकार द्वारा घोषित राहत पैकेज से राज्य को राहत की एक नई उम्मीद मिली है। सरकार की तत्परता, जनता की एकजुटता और प्रशासन की सक्रियता से यह निश्चित है कि उत्तराखंड एक बार फिर मजबूती से खड़ा होगा।
आपदा बड़ी है, पर मानव संकल्प उससे भी बड़ा — यही इस कठिन समय की सबसे बड़ी सीख है।