दिल्ली में दिवाली के बाद तार-तार हुई हवा — AQI 550 पार, GRAP-2 लागू
दिवाली की रात सिर्फ पटाखों की गड़गड़ाहट से नहीं बल्कि जहरीली धुंध से भी दिल्लीवासियों की सांसें रोक रही हैं। दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल वायु गुणवत्ता इतनी बिगड़ी है कि कभी “रंगोली और दीपों वाला त्योहार” अब “धुँए और धुंध में घुटन” में बदल गया है।
🔍 क्या हुआ?
- दिवाली के दिन राजधानी में हवा का हाल बुरा था: सुबह-सुबह AQI यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार दर्ज हुआ और कुछ मापदंडों में मौके पर 400 से ऊपर भी गया।
- कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने कहा कि वायु गुणवत्ता तो 500 से भी ऊपर जा सकती थी। (हालाँकि अनेक स्रोतों में 550 की संख्या स्पष्ट नहीं पाई गई)
- इस बिगड़ती हुई हवा की स्थिति के बीच Commission for Air Quality Management (CAQM) ने Graded Response Action Plan (GRAP) का स्टेज 2 (GRAP-2) लागू कर दिया है, पूरब-पश्चिम दिल्ली और एनसीआर में।

📌 GRAP-2 में क्या-क्या बंद या नियंत्रित हुआ?
- डीजल जनरेटर सेट्स पर पाबंदी (सिवाय बहुत आवश्यक/आपात सेवाओं के)।
- निर्माण-विनाश (construction & demolition) कार्यों में धूल नियंत्रण के कड़े उपाय, कुछ जगहों पर संयम।
- खुली जगहों पर कचरा, पत्ती-कूड़ा आदि जलाने पर रोक।
- निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन विकल्प बढ़ाए गए, पार्किंग शुल्क में वृद्धि की गई।
- सड़कों पर नियमित रूप से पानी छिड़काव और धूल हटाने-सफाई के काम तेज़ किए गए।
🧭 क्यों हुआ इतना बढ़ा प्रदूषण?
- दिवाली की रात पटाखों, आतिशबाज़ियों की भरमार, जिससे अचानक PM2.5/PM10 कणों का स्तर बहुत ऊपर गया।
- मौसम-हालात जैसे धीमी हवाएँ, ठंडी रातें या तापमान-उतार-चढ़ाव, धूल-और कणों का फैलाव कम होने का कारण बने। एनसीआर के आसपास क्षेत्रों में कृषि पराली जला देना, औद्योगिक उत्सर्जन तथा वाहन-प्रदूषण का मिलाजुला प्रभाव। (यह विशेष रूप से दिवाली के बाद की स्थिति में बहुत अहम होता है)
⚠️ स्वास्थ्य के लिए खतरा
- ऐसी हवा में बच्चों, बुज़ुर्गों, अस्थमा या हृदय संबंधी मरीजों को विशेष सावधानी लेनी चाहिए: बाहर कम निकलें, मास्क पहनें, वायू-शुद्ध करें।
- आंखों-गले में जलन, खांसी-घुटन, सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें अधिक हो सकती हैं।
- हवा-प्रदूषण लम्बे समय तक रहने पर क्रॉनिक रोगों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
🧑💼 और क्या करना चाहिए?
- घर में जहाँ संभव हो एयर प्यूरीफायर या कम से कम हवादार कमरा चुनें।
- बाहर निकलते वक़्त एन95/KN95 मास्क पहनना बेहतर रहेगा।
- बाहर के समय को कम करें, विशेष रूप से सुबह-सुबह या शाम के समय जब प्रदूषण अधिक होता है।
- निजी वाहन का उपयोग कम और सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट बढ़ाएं।
- पटाखों के बजाए सुरक्षित-पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाएं, क्योंकि पटाखे विशेष रूप से पर्टिकुलेट मैटर बढ़ाने में योगदान करते हैं।
📅 आगे क्या होगा?
विश्लेषकों का मानना है कि दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर और भी बढ़ सकता है क्योंकि मौसम ठंडा होगा और हवाएँ धीमी हो सकती हैं। इस बीच GRAP-2 के बावजूद यदि AQI 401–450 के बीच जाता है तो GRAP-3 लागू किया जा सकता है, और यदि 450 से ऊपर जाता है तो GRAP-4 (Severe+) की संभावना बनती है।
यह स्थिति हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि त्योहारों के उल्लास के साथ-साथ हमें पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति गंभीर होना होगा। तुरंत सुधार न हुआ तो सिर्फ मना हुआ पटाखा नहीं, बल्कि हमारी अपनी सांसें भारी पड़ सकती हैं।