नई दिल्ली। दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा आज पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ की जा रही है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के गिरधारी स्वरूप की आराधना का प्रतीक है। इस दिन भक्त गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं और श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित कर उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और घर-घर में पूजा-अर्चना की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
क्यों मनाई जाती है गोवर्धन पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र देव के अभिमान को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। उस समय ब्रजवासियों ने इंद्र देव की पूजा न कर गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी, जिससे इंद्र क्रोधित हो गए और ब्रज पर मूसलधार वर्षा कर दी। तब श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों और गो-धन की रक्षा के लिए सात दिन तक पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर सभी को शरण दी। उसी घटना की स्मृति में हर वर्ष गोवर्धन पूजा की जाती है।

गिरिराज महाराज का होगा विशेष श्रृंगार
मथुरा, वृंदावन, नंदगांव और बरसाना जैसे ब्रज क्षेत्र के मंदिरों में आज विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। गोवर्धन पर्वत के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा है। गिरिराज महाराज के मंदिरों में फूल, आभूषण और दीपों से विशेष श्रृंगार किया गया है। भक्तगण ‘जय-जय श्री राधे’ और ‘गोवर्धन धरणे की जय’ के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना रहे हैं।
छप्पन भोग का विशेष महत्व
गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाने की परंपरा है। कहा जाता है कि जब श्रीकृष्ण ने सात दिन तक लगातार पर्वत उठाया था, तब वे अन्न ग्रहण नहीं कर पाए थे। इसीलिए ब्रजवासी उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए 56 प्रकार के व्यंजन बनाकर उन्हें अर्पित करते हैं। इन व्यंजनों में मिठाइयाँ, फल, माखन-मिश्री, पकवान और दूध से बने अनेक पदार्थ शामिल होते हैं।
गोवर्धन परिक्रमा का पुण्य
ब्रज क्षेत्र में आज लाखों श्रद्धालु गोवर्धन परिक्रमा करने पहुंचे हैं। यह परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर लंबी है और भक्त इसे नंगे पांव पूरा करते हैं। माना जाता है कि गोवर्धन की परिक्रमा करने से समस्त पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। गोवर्धन महाराज की जयकारों के बीच भक्त निरंतर “राधे-राधे” का जाप करते हुए परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।
देशभर में विशेष आयोजन
केवल ब्रज क्षेत्र ही नहीं, बल्कि देशभर के मंदिरों में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। दिल्ली, वाराणसी, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर और मुंबई जैसे शहरों के कृष्ण मंदिरों में विशेष भोग, आरती और भजन संध्या का कार्यक्रम रखा गया है। अनेक स्थानों पर अन्नकूट के रूप में विशाल भंडारे भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें भक्तों को प्रसाद वितरित किया जा रहा है।
धार्मिक मान्यता और आस्था का पर्व
गोवर्धन पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति आभार का भी प्रतीक है। इस दिन लोग गायों की पूजा करते हैं, उन्हें गुड़ और हरा चारा खिलाते हैं। इससे यह संदेश दिया जाता है कि मनुष्य को प्रकृति, पशु और पर्यावरण के प्रति सम्मान भाव रखना चाहिए।
भक्ति और आनंद का संगम
आज पूरा ब्रज क्षेत्र भक्ति और उल्लास में डूबा हुआ है। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और दीपों की रौशनी से वातावरण गूंज उठा है। श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर गिरिराज महाराज के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं। शाम को आरती के बाद आतिशबाजी और दीपदान के कार्यक्रम भी होंगे।