Respect तो बनती थी… रोहित शर्मा को कप्तानी से हटाना एक ऐसा फैसला जिसने कांग्रेसियों की तरह चौंका दिया, BCCI पर उठ रहे सवाल
क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में अलग ही जगह रखने वाले रोहित शर्मा को ODI टीम की कप्तानी से हटाए जाने का निर्णय न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) की प्रबंधन शैली और रणनीतिक फैसलों की विश्वसनीयता पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। आखिर कैसे एक ऐसा खिलाड़ी, जिसने भारत को ICC खिताब जिताए हों, अचानक एक जिम्मेदारी से बाहर कर दिया जाए? आइए इस फैसले की तह तक जाएँ — पृष्ठभूमि, तर्क, विरोध और भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ — और समझें कि इस फैसले ने क्यों “Respect तो बनती थी” जैसी सोच को फिर से ज़िंदा कर दिया है।
- पृष्ठभूमि: कप्तान रोहित और उनके सफर की कहानी
रोहित शर्मा ने भारतीय क्रिकेट में अपनी कप्तानी को एक पहचान दी है। उन्होंने टीम को T20 वर्ल्ड कप (2024) और चैंपियंस ट्रॉफी (2025) जैसे ICC खिताब दिलाए, और अपनी कप्तानी में टीम को संतुलन व आत्मविश्वास दिया।
उनकी गेंदबाज़ी, बैटिंग और कप्तानी कौशल को कई पूर्व क्रिकेटर्स ने तारीफों से नवाजा है।
अप्रैल – मई 2025 के आसपास उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया, जिससे वे शुद्ध रूप से लिमिटेड ओवर प्रारूप में ही सक्रिय रहे।
इस पृष्ठभूमि में, यह कदम कि उन्हें ODI कप्तानी से हटाया जाए, जितना रणनीतिक लगना चाहिए था, उतना ही व्यक्तिगत और भावनात्मक स्तर पर विवादास्पद हुआ।

- निर्णय: कब, कैसे और क्यों?
4 अक्टूबर 2025 को BCCI ने घोषणा की कि शुभमन गिल को भारत की ODI टीम का नया कप्तान बनाया गया है और रोहित शर्मा की कप्तानी की भूमिका समाप्त हो गई है।
आधिकारिक तर्क
- लीडरशिप समन्वय: चीफ सेलेक्टर अजित अगरकर ने कहा कि “तीन अलग-अलग कप्तान — टेस्ट, ODI और T20 — को संभालना व्यावहारिक नहीं है।”
- लंबी अवधि की योजना: 2027 वर्ल्ड कप को देखते हुए, नए कप्तान को समय देना और ट्रांज़िशन करना ज़रूरी था।
- रोटेशन और स्थिरता: अब गिल को दो प्रारूपों (Test + ODI) की कप्तानी मिली है, जिससे टीम को नेतृत्व स्थिरता मिले। (गिल पहले से टेस्ट कप्तान हैं)
ये तर्क कानूनी और रणनीतिक स्तर पर समझ में आते हैं — लेकिन जब भावनात्मक और मानवीय पक्ष सामने आता है, तो सवाल उठते हैं कि “सम्मान” के साथ यह बदलाव किया गया या नहीं?
- जनता, पूर्व खिलाड़ी और विश्लेषकों की प्रतिक्रिया
(क) प्रशंसक और सोशल मीडिया
जब यह फैसला सार्वजनिक हुआ, सोशल मीडिया पर #ThankYouRo जैसे हैशटैग चल पड़े। प्रशंसक भावुक हो गए, उनके शब्दों में “आपका नेतृत्व यूँ ही इतिहास में बचेगा” की तरह की श्रद्धांजलि थी।
कुछ प्रतिक्रियाएँ ज़ोरदार थीं:
“BCCI ने अपनी सच्ची रंग-रूप फिर दिखाया।”
“ये कैसा सम्मान है एक ऐसी कप्तानी को जिसने ICC खिताब दिए?”
“कम से कम एक अलविदा सीरीज़ तो दी होती।”
(ख) पूर्व क्रिकेटर्स, विशेषज्ञ
- वीरेंद्र सहवाग, जाहिरन, मुहम्मद कैरिक जैसे अनुभवी खिलाड़ियों ने रोहित को MS Dhoni के बाद दूसरे सबसे सफल कप्तान कहा।
- वहीं, नवजोत सिद्धू ने यह सवाल उठाया कि “कप्तान को बीच में ही हटाया जाना गलत संकेत देता है” और कहा कि रोहित “अधिक सम्मान के पात्र थे।”
- कुछ विश्लेषकों ने तर्क दिया कि BCCI निर्णय में राजनीति और बोर्ड की रणनीति अधिक भूमिका निभाई, खिलाड़ी भावना की कम।
(ग) आलोचनाएँ BCCI पर
- यह निर्णय ऐसे आया जैसे अचानक — सुनियोजित घोषणा नहीं बल्कि चौंकाने वाला झटका।
- लंबे समय से योगदान देने वाले खिलाड़ियों को विदाई या सम्मान देने की परंपरा नज़रअंदाज होती दिखी।
- क्या यह फैसला “प्रशासनिक स्वच्छता” की बजाय “उच्च पदस्थ प्रभाव” के दबाव में लिया गया?
- बोर्ड और चयन समिति को आलोचना झेलनी पड़ी कि फैसले में पारदर्शिता की कमी थी।
- क्या सम्मान खो गया — और क्यों “Respect तो बनती थी”?
जब कोई खिलाड़ी वर्षों से टीम का नेतृत्व करता है, श्रृंखला जीतता है और देश का मान बढ़ाता है, तो उससे जुड़ा सम्मान सिर्फ पद से नहीं आता — यह टीम, बोर्ड और प्रशंसकों की नज़र में पवित्र रिश्ता बन जाता है।
रोहित शर्मा ने मैदान पर अपने फैसले, मैदान के बाहर अपने व्यक्तित्व और नेतृत्व शैली से यह सम्मान अर्जित किया था। इस सम्मान को अचानक कम करना — चाहे वह रणनीतिक कारणों से हो — एक भावनात्मक अस्थिरता को जन्म दे सकता है।
“Respect तो बनती थी” — इस लाइन में एक अपेक्षा छिपी है: वह कि बोर्ड और चयन समिति उन खिलाड़ियों के प्रति सम्मान दिखाएं जो देश सेवा में अपना समय दे चुके हों। एक विदाई, एक संवाद, एक संदेश — ये चीजें महत्वपूर्ण होती हैं।
यह परिवर्तन, इस तरह अचानक और सार्वजनिक रूप में आने वाला, उन अनकहे भावनाओं और अपेक्षाओं को तोड़ सकता है। इसके पीछे यह डर भी होता है कि यदि आज एक बड़े खिलाड़ी को इस तरह हटाया जाए, तो कल अन्य खिलाड़ियों पर भी ऐसी छाँव पड़े।
- भविष्य की चुनौतियाँ और प्रश्न
- क्या शुभमन गिल, नई कप्तानी में दबाव न झेलें?
- रोहित शर्मा की टीम में क्या भूमिका होगी — खिलाड़ी, सलाहकार या कम भूमिका?
- बोर्ड और चयन समिति कैसे यह संतुलन बनाएँगी कि अनुभव बनाम युवा नेतृत्व?
- क्या भविष्य में ऐसे फैसले और अधिक पारदर्शी होंगे ताकि “सम्मान की अपेक्षा” को ठेस न पहुंचे?
- निष्कर्ष
रोहित शर्मा को कप्तानी से हटाना सरप्राइज से कम नहीं है — और यह सिर्फ एक क्रिकेटिंग फैसला ही नहीं, बल्कि भावना और सम्मान का मामला बन गया है। BCCI ने इसे रणनीतिक निर्णय कह दिया, लेकिन जनता और पुराने खिलाड़ी इसे नाजुक मानवीय स्तर पर देख रहे हैं।
Respect तो बनती थी — और वह वह नाजुक धागा है जो सिर्फ बड़े प्रदर्शन या निर्णय से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, संवाद और मानवीय जुड़ाव से बनता है।
क्रिकेट मैदान में जीत-हार होती है, लेकिन मानव संबंधों में सम्मान का मोल और भी गहरा होता है।