मध्य प्रदेश में सनसनीखेज मामला: 9 बच्चों की मौत, Coldrif कफ सिरप पर प्रतिबंध
मध्य प्रदेश सरकार ने एकदम तीव्र कार्रवाई करते हुए राज्यभर में Coldrif कफ सिरप की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम छिंदवाड़ा जिले में हुई 9 मासूम बच्चों की मौत के बाद उठाया गया है — इनमें बच्चों को यह सिरप लेने के बाद किडनी फेल होने की आशंका जताई जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले को ‘बहुत दुखद’ बताते हुए कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सोशल मिडिया पर यह संदेश देते हुए कहा कि सरकार ने तुरंत कार्रवाई की है और पूरे मध्य प्रदेश में Coldrif सिरप की बिक्री पर पाबंदी लगा दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि सिरप बनाने वाली कंपनी के अन्य उत्पादों की बिक्री पर भी रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

घटना की पृष्ठभूमि एवं मौतों की रिपोर्ट
इस दुखद घटना की शुरुआत 20 सितंबर से हुई। छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में बच्चों में खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायतें थीं। उन बच्चों को स्थानीय डॉक्टरों ने Coldrif (और कुछ मामलों में Nextro‑DS) सिरप दी, लेकिन स्थिति और बिगड़ गई। इसके बाद बच्चों को छिंदवाड़ा और नागपुर के अस्पतालों में भर्ती करवाया गया, लेकिन उनमें से 9 बच्चों की जान नहीं बच पाई। मृत बच्चों के नामों में शिवम, अदनान, उसैद, विधि, संध्या, विकास, हेतांश, चंचलेश, ऋषिका शामिल बताए जा रहे हैं। राज्य प्रशासन के अनुसार, यह सभी बच्चे चार-पांच साल से कम उम्र के थे।
जब मामले की प्रारंभिक जांच की गई, तो यह पाया गया कि Coldrif सिरप (बैच SR‑13, मई 2025) में डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) नामक जहरीला रसायन 48.6% मात्रा में पाया गया है, जो स्वीकृत सीमा से बहुत अधिक है। यही कारण माना जा रहा है कि बच्चों की किडनी काम करना बंद कर दी और उनकी मृत्यु हो गई।
सरकार की कार्रवाई और आदेश
घटना का संज्ञान लेते ही राज्य सरकार ने नीचे दिए गए कदम उठाए हैं:
- राज्यव्यापी बैन
पूरे मध्य प्रदेश में Coldrif सिरप की बिक्री, वितरण और रखरखाव पर रोक लगा दी गई है। सिरप बनाने वाली कंपनी Sresan Pharmaceuticals के अन्य प्रोडक्ट्स की बिक्री बंद करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। - नमूना जप्त करना और परीक्षण
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं। छिंदवाड़ा में 433 बोतलें फ्रीज़ कर दी गईं, जिनमें से 222 बोतलें पहले ही बेची जा चुकी थीं। अन्य बैचों के नमूनों को भी परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। - विशेष जांच टीम और केंद्र सहयोग
राज्य सरकार ने एक विशेष राज्य-स्तरीय टी eam गठित कर दी है, जो वितरण चेन, ऑडिट लॉग, डॉक्टरों के पर्चे एवं आपूर्ति मार्ग की गहन जांच करेगी। इसके साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, CDSCO, NCDC एवं अन्य संघीय एजेंसियाँ इस मामले की जांच में सहयोग कर रही हैं। - मुआवजा और चिकित्सा खर्च
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतक बच्चों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। साथ ही, अभी भी इलाजरत बच्चों के पूरी चिकित्सा खर्च को राज्य सरकार वहन करेगी। - सख्ती और दायित्व तय करना
सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। मोहन यादव ने कहा, “दोषियों को छोड़ेंगे नहीं।” स्वास्थ्य मंत्री एवं उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भी कहा कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।
चुनौतियाँ और सवाल
यह मामला न केवल एक त्रासदी है, बल्कि दवा-नियंत्रण प्रणाली, गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी की गंभीर कमियों को उजागर करता है। नीचे कुछ अहम प्रश्न उठते हैं:
- कैसे एक जहरीला रसायन इतनी अधिक मात्रा में दवा में शामिल हो गया?
- क्या यह त्रुटि है या जानबूझकर मिलावट?
- दवा नियामक एजेंसियों (FDA, CDSCO) की जांच और निगरानी प्रणाली किस हद तक सक्षम थी?
- डॉक्टरों की जिम्मेदारी क्या है — पर्चे पर इस दवा लिखने की अनुमति किसने दी?
- अब भविष्य में ऐसी घटनाएँ कैसे रोकी जाएँ?
इनके जवाबों के आधार पर ही यह सुनिश्चित हो सकेगा कि आगे ऐसी त्रासदी न हो।
निष्कर्ष
Coldrif सिरप से 9 मासूम बच्चों की मृत्यु ने पूरे मध्य प्रदेश और देश को झकझोर दिया है। सरकार ने तुरंत कदम उठाकर इस सिरप पर बैन लगाया, विशेष जांच टीम गठित की और दोषियों को सज़ा देने का वादा किया। लेकिन अब सवाल यह है कि यह कार्रवाई सिर्फ क्षणिक तत्काल कदम न बन जाए — बल्कि पूरे दवा नियंत्रण, वितरण और निगरानी तंत्र में सुधार का पहला कदम बने। बच्चों की जान चली गई, लेकिन अगर इस घटना से सख्त सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित हो जाए, तो शायद मृतकों का बलिदान व्यर्थ न जाए।