शिमला/चंडीगढ़, 9 सितंबर 2025:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक महत्वपूर्ण दौरे पर हिमाचल प्रदेश और पंजाब पहुंचेंगे, जहां हाल ही में आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। यह दौरा न केवल एक प्रशासनिक समीक्षा का हिस्सा है, बल्कि एक संवेदनशील नेतृत्वकर्ता के रूप में पीएम मोदी की पीड़ितों के प्रति सहानुभूति और समर्थन का प्रतीक भी माना जा रहा है।
पिछले कुछ हफ्तों में हिमाचल और पंजाब के कई इलाके मूसलधार बारिश और अचानक आई बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। दर्जनों गांव जलमग्न हो गए, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा, और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। कई लोगों की जान भी इस प्राकृतिक आपदा में जा चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री का यह दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हवाई सर्वे के जरिए हालात का जायजा
पीएम मोदी सबसे पहले हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, मंडी और कुल्लू जिलों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। ये जिले बाढ़ और भूस्खलन से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति को खुद देखना चाहते हैं ताकि केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली मदद को जमीनी सच्चाई के आधार पर तय किया जा सके।
हवाई सर्वे के दौरान उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारी भी इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री के साथ संवाद करेंगे।
पीड़ितों से सीधी बातचीत: एक मानवीय पहल
प्रधानमंत्री केवल स्थिति का हवाई सर्वेक्षण ही नहीं करेंगे, बल्कि राहत शिविरों में जाकर बाढ़ पीड़ितों से सीधा संवाद भी करेंगे। यह संवाद केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि पीड़ितों की समस्याओं, दर्द और ज़रूरतों को समझने की एक गंभीर कोशिश होगी।
प्रधानमंत्री उनसे बात कर यह समझना चाहेंगे कि राहत सामग्री समय पर मिल रही है या नहीं, चिकित्सा सुविधा कैसी है, और बच्चों तथा बुजुर्गों की क्या स्थिति है। उम्मीद की जा रही है कि पीएम मोदी की सीधी बातचीत से प्रशासन को जमीनी स्तर की परेशानियों को समझने और समाधान निकालने में मदद मिलेगी।
पंजाब में भी भारी नुकसान: फिरोज़पुर, मोगा और रोपड़ पर रहेगा फोकस
हिमाचल के बाद पीएम मोदी पंजाब के प्रभावित जिलों – खासकर फिरोज़पुर, मोगा और रोपड़ – का दौरा करेंगे। पंजाब में भी कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया। हजारों एकड़ फसलें तबाह हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे में भी वे बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात करेंगे और स्थानीय अधिकारियों से चर्चा कर राहत कार्यों की समीक्षा करेंगे। इस दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी प्रधानमंत्री के साथ मौजूद रह सकते हैं।
राजनीतिक नहीं, मानवीय दौरा: केंद्र और राज्य के रिश्तों पर सकारात्मक असर की उम्मीद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा केवल एक आपदा प्रबंधन गतिविधि नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग के एक सकारात्मक संकेत के रूप में भी देखा जा सकता है। पंजाब और हिमाचल दोनों में विपक्षी पार्टियों की सरकारें हैं, लेकिन प्रधानमंत्री का यह दौरा यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय आपदाओं के समय राजनीति को पीछे छोड़ देना चाहिए।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “प्रधानमंत्री का यह दौरा यह दिखाता है कि केंद्र सरकार आपदा की घड़ी में राज्यों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है, चाहे वहां किसी भी दल की सरकार हो।”
राहत पैकेज की घोषणा संभव
ऐसी संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री इस दौरे के बाद एक बड़े राहत पैकेज की घोषणा कर सकते हैं। केंद्र सरकार पहले ही दोनों राज्यों को अंतरिम सहायता प्रदान कर चुकी है, लेकिन जमीनी नुकसान का आंकलन करने के बाद अतिरिक्त सहायता की घोषणा की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को दोबारा खड़ा करने के लिए बड़ी आर्थिक मदद की जरूरत होगी। इसके अलावा, प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए दीर्घकालिक योजना भी बनाई जा सकती है।
आपदा प्रबंधन पर होगी विशेष बैठक
पीएम मोदी के दौरे के दौरान एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की जाएगी, जिसमें बाढ़ राहत और पुनर्वास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में NDMA, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), सेना, NDRF और स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री इस बैठक में भविष्य की तैयारियों, अर्ली वार्निंग सिस्टम, और इन्फ्रास्ट्रक्चर को जलवायु परिवर्तन के लिहाज से सुरक्षित बनाने पर भी फोकस कर सकते हैं।
स्थानीय लोगों की उम्मीदें
पीएम मोदी के दौरे को लेकर स्थानीय लोगों में उम्मीद की लहर है। कई बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि जब देश का प्रधानमंत्री खुद उनके बीच आता है और उनकी बातें सुनता है, तो इससे मनोबल बढ़ता है। कुल्लू के एक राहत शिविर में रह रहे बुजुर्ग किसान गोविंद राम ने कहा, “हमने बहुत नुकसान झेला है। अगर मोदी जी खुद देखने आ रहे हैं तो हमें उम्मीद है कि सरकार हमारी मदद जरूर करेगी।”
निष्कर्ष: एक संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा एक बार फिर यह साबित करता है कि आपदा के समय नेतृत्व केवल निर्देश देने तक सीमित नहीं होता, बल्कि खुद मैदान में उतरकर स्थिति को समझना और लोगों के दुख में शामिल होना भी उसकी जिम्मेदारी है।
यह यात्रा केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि उस संवेदनशीलता का प्रतीक है जो किसी भी लोकतांत्रिक नेता को जनता से जोड़ती है। अब देखना यह है कि इस दौरे के बाद दोनों राज्यों को कितनी मदद मिलती है और वह कितनी जल्दी बर्बादी से फिर से उबर पाते हैं।